हम सर झुकाए ये करें दुआ

वो गीत लिखें
तुम लिखो किताब
उस भीड़ में
कोशिश जारी है

वो अमीर बनें
तुम बनो नवाब
तकदीर का रहम
ना खाली है

जब पीर कहे
वो करे कमाल
ज़ंजीर ना किसी के
भारी है

वो ज़मीन चलें
तुम रचो ख्वाब
हर उम्मीद की
मंज़िल बाकी है